Showing posts with label गीत. Show all posts
Showing posts with label गीत. Show all posts

Monday, May 21, 2012

Outdated Dream

Do dreams come with life span ?
certainly they do. We all wanted to be truck/bus driver or Conductor during our childhood but no one achieved it. This is also about a dream , a teenage one. Dream of dusky innocence. One that was too poetic and vintage. I did have it for shortest time may be for a week or so. Then I became wise and decided to follow other things to prove myself a FOOL.

कही एक मासूम नाजुक सी लडकी
बहुत खुबसुरत मगर सांवली सी

मुझे अपने ख्वाबों की बाहों में पाकर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा-कसमसाकर
सरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख्वाब दिन के मुंडेरों पे आके
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साझ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेसख्ता धीमें धीमें सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियाँ कंपकपाती तो होगी
कलम हाथ से छुट जाता तो होगा
उमंगे कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिखकर
वो दातों में उंगली दबाती तो होगी

जुबाँ से कभी अगर उफ् निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पाँव पडते तो होंगे
जमीं पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी.....

sung by Md. Rafi from 'Shankar Hussain' [1977]

Wednesday, September 2, 2009

Post 0

आरंभ है प्रचंड, बोले मस्तकों के झुंड
आज ज़ंग की घडी की तुम गुहार दो.
आन बान शान या कि जान का हो दान,
आज एक धनुष के बाण पे उतार दो...
आरम्भ है प्रचंड .......

मन करे सो प्राण ले, जो मन करे सो प्राण दे,
वही तो एक सर्व शक्तिमान है !
विश्व की पुकार है,ये भागवत का सार है,
की युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है !!
कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीड़ हो,
जो लड़ सका है वो ही तो महान है !!!

जीत की हवस नहीं, किसीपे कोई वश नहीं
क्या जिंदगी है, ठोकरों पे मार दो....
मौत अंत है नहीं, तो मौत से भी क्यों डरें
ये जाके आसमान में दहाड़ दो.....
आरंभ है प्रचंड..................


हो दया का भाव याकि शौर्य का चुनाव,
याकि हार का वो घाव तुम ये सोच लो !
याकि पुरे भाल पर जला रहे विजय का लाल,
लाल ये गुलाल तुम ये सोच लो !!
रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो याकि,
केसरी हो ताल तुम ये सोच लो !!!

जिस कवी की कल्पना में जिंदगी हो प्रेमगीत
उस कवी को आज तुम नकार दो...
भीगती नसों में आज, फूलती रगों में आज
आग की लपट का तुम बघार दो......
आरम्भ है प्रचंड..


सुरुवात तर झाली एकदाची